दिवान-ए-चन्दन


चाँद में सूरत देखने की कोशिश तेरी हर शब् की मैंने
तेरी सूरत नहीं लेकिन ऐसी कि चाँद दिखा पाए
आइना तो टूट जाता है चाँद कहाँ बच पाए
सुना था निशानी रह जाती है ग़र टूटे को जोड़ा जाये
चाँद में दाग भी वही निशानी है ये महसूस की मैंने
चाँद में सूरत देखने की कोशिश तेरी हर शब् की मैंने
दिदार-ए-ख्वाहिश है दिल में बस तुझसे रु-ब-रु हो जाये
जिसने चाँद को शर्मिंदा किया जरा सी नुमाइश हो जाये
निराधार तेरे और चाँद की कोई तशबीह न हो जाये
इसलिए दिवान-ए-'चन्दन' सारी तेरे नाम की मैंने
चाँद में सूरत देखने की कोशिश तेरी हर शब् की मैंने
                      Written By:-
                 Chandan Kumar Gupta